वह खुद को
कई हिस्सों में बाँटता है
और फिर
सुख शांति से जीना चाहता है
देखिये आदमी किस तरह
अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारता है |
कहाँ हैं वे
जिन्हें खोजती हैं कविताएँ
कविता को खोजते हों जो
वे अब रहे कहाँ ?
कई हिस्सों में बाँटता है
और फिर
सुख शांति से जीना चाहता है
देखिये आदमी किस तरह
अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारता है |
कहाँ हैं वे
जिन्हें खोजती हैं कविताएँ
कविता को खोजते हों जो
वे अब रहे कहाँ ?
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