Tuesday, 7 January 2014

किसी भी पार्टी का सदस्य बनने के बाद पार्टी के नेताओं की बेहूदा हरकतों और वक्तव्यों के समर्थन में हाथ उठाना जब आपकी बाध्यता हो जाती है ,कुछ ही दिनों में आप घुटन महसूस करने लगते हैं |


सभी हिंदी भाषी प्रदेशों में हिंसक लूट मची हुई है ,एक सवाल है कि क्या इस लूट में हम शामिल नहीं हैं ?हम जब लूटते हैं तो उसे लूट नहीं मानते,हम जब चोरी करते हैं तो उसे चोरी नहीं मानते,यही दोगली नैतिकता इस हिंसक लूट का कारण है |  

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