गालियाँ अध-कचरे लोग देते हैं, भक्त लोग केवल प्रशंसा करने में व्यस्त रहते हैं , किसी विचारधारा विशेष से जुड़े लोग पार्टी के प्रवक्ता मात्र होकर रह जाते | मैं न बुद्धिजीवी हूँ ,न किसी का भक्त |६४ वर्ष की पकी उम्र में केवल सूरज का उगना और उसका अस्त होना दिखाई देता है किसी भी रंग का हो चश्मा आपको दुराग्रही बनाता है |
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