Friday, 15 April 2016

अपनी विद्ता से लोगों को निरुत्तर कर देने से समस्याओं का समाधान नहीं होता | आज देश की तमाम समस्याएं बाबा साहब आंबेडकर की अदूरदर्शिता का परिणाम हैं |
जातीयता निश्चित ही एक समस्या है और बाबा साहेब की अदूरदर्शिता से अब यह पहाड़ की तरह से अड़ी खड़ी है |
अम्बेडकर द्वारा दिलाई एक भी प्रतिज्ञा बहुजनों को याद नहीं रह गयी है वे सब भी भ्रष्ट्र हिन्दुओं की तरह ही व्यवहार करते है और आर्थिक रूप से संपन्न बहुजन तो बिलकुल ब्राह्मण की तरह व्यवहार करने लगता है |



जब तक वह पास नहीं है/ तभी तक ऐसा लगता है/ उसके पास आ जाने पर/ सुकून भागा-भागा फिरता है / सुकून केवल एक मनःस्थिति है / किसी के पास होने और न होने से इसका सम्बन्ध जोड़ना मेरी समझ में नहीं आता |


आज़ादी के बाद सत्ता मिलते ही देश प्रेम का बुखार धीरे-धीरे उतरने लगा और देश को लूटने का सिलसिला शुरू हुआ | इमरजेंसी के बाद जय प्रकाश नारायण और लोहिया के चेलों के हाथ सत्ता आई तो उन्होंने और जम कर लूटा | आज़ादी के बाद भारत का इतिहास लूटेरों की वीर गाथाओं से अटा पड़ा है |


पैदाइश से निर्धारित होता है हमारा धर्म | जब हम सोचने समझने लायक होते तब तक हम हिन्दू या मुसलमान हो चुके होते हैं | इसलिए यह कहना " जब तक सोच समझ न लो, तब तक मज़्हब अख्तियार मत करो" एक सोचा समझा हथकंडा ही है |.

No comments:

Post a Comment