हम घर में सच बोलने का खतरा क्यों नहीं उठाते, वक़्त मिले तो सोचियेगा जरूर.
सैलाब सी है जिंदगी
इसमें हमारी औकात ही क्या.
न आधा हूँ, न पूरा हूँ
ऊँट के मुहँ में जीरा हूँ
सर्वशक्तिमान को आपके भजन,कीर्तन और भोग की कोई आवश्यकता नहीं है.ढोंग आपके इस पाखण्ड में है.
सैलाब सी है जिंदगी
इसमें हमारी औकात ही क्या.
न आधा हूँ, न पूरा हूँ
ऊँट के मुहँ में जीरा हूँ
सर्वशक्तिमान को आपके भजन,कीर्तन और भोग की कोई आवश्यकता नहीं है.ढोंग आपके इस पाखण्ड में है.
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