Sunday, 3 September 2017

सिर्फ नकारात्मकता ही ढूँढना स्वस्थ मानसिकता का परिचायक नहीं होता . ये चटनी बनाने का व्यवसाय बंद कीजिये जनाब .

इंसानियत अभी बची है और इंसानियत का हिन्दू या मुसलमान से कोई लेना देना नहीं है.

उफ़,हम किधर जा रहे हैं,इंसान थे शैतान बनते जा रहे हैं.हे खुदा तू शैतान को अपनी कैद से क्यों करता है रिहा.
रंगहीन सपनों की कोई इबारत नहीं होती
बालू के ढूह पर खड़ी कोई इमारत नहीं होती.

कोई स्पर्श ऐसा नहीं होता जिसे हम भूल न पाएं
फिर हम क्यों प्रेम के नाम पर अपना घर बसाएं .

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