अब नहीं
मुझको है कोई मोह
छिपने के लिए मैंने
खोज ली है खोह
डर नहीं है इसका कि
कोई खोज लेगा
सुकून में हूँ यह सोचकर
हवाओं का रुख
कोई तो मोड़ देगा |
मुझको है कोई मोह
छिपने के लिए मैंने
खोज ली है खोह
डर नहीं है इसका कि
कोई खोज लेगा
सुकून में हूँ यह सोचकर
हवाओं का रुख
कोई तो मोड़ देगा |
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