Thursday, 28 March 2013

तमाम हिन्दू महापंडितों और मुल्लाओं की मिलीभगत है यह | किसी भी धर्म या सम्प्रदाय का पुरुष हो स्त्री के बारे में सब एकमत हैं उन्हें आजादी देने के खिलाफ़ | स्त्री की शुचिता को उसकीं टांगों के बीच कैद कर दिया और स्त्री ने इसे ज्यों का त्यों मान लिया है | ताज्जुब होता है कि पुरुष की शुचिता पर इन धर्म ग्रंथों ने कभी कोई प्रश्नचिन्ह लगाया ही नहीं | पुरुष बेख़ौफ़ होकर घूमता है और स्त्री की  टांगों के बीच कैद उसकी शुचिता को बार बार भंग करता है |और मुल्ला कहते हैं कि चार वयस्क मर्दों की गवाही लाये यानि की उन चार मर्दों की गवाही प्राप्त करने के लिए उन चारो को भी अपनी शुचिता को भंग करने का मौका प्रदान करे | शर्म आती है कि हम इन्ही मुल्लाओं और पंडितों की पूजा करते है |

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