रोज़ खेलते होली
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चेहरे के रंग
बदलने का सिलसिला
क्या होगा कभी ख़त्म ?
आखिर कब तक निबाहोगे
यह सड़ी गली रस्म ?
होली के दिन जितने चाहो
रंग चढ़ा लो चेहरे पर
अपना चेहरा मिल ही जाता है
साबुन से धुलकर |
रोजमर्रा की जिंदगी में
घर हो या बाहर
रोज रोज
जो रंग हम लगाते हैं
अपने चेहरे पर
और फिर
खुद भूल जाते हैं अपनी शक्ल |
आइने में देखकर
तुम छिपा सकते हो
चेहरे पर खरौंच के निशान
लेकिन यह बताओ
अपने आप से तुम
कैसे छिपाओगे अपने जख्म ?
हर रोज
चेहरे का रंग बदलने की
सड़ी गली रस्म
आखिर कब तक निबाहोगे ?
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चेहरे के रंग
बदलने का सिलसिला
क्या होगा कभी ख़त्म ?
आखिर कब तक निबाहोगे
यह सड़ी गली रस्म ?
होली के दिन जितने चाहो
रंग चढ़ा लो चेहरे पर
अपना चेहरा मिल ही जाता है
साबुन से धुलकर |
रोजमर्रा की जिंदगी में
घर हो या बाहर
रोज रोज
जो रंग हम लगाते हैं
अपने चेहरे पर
और फिर
खुद भूल जाते हैं अपनी शक्ल |
आइने में देखकर
तुम छिपा सकते हो
चेहरे पर खरौंच के निशान
लेकिन यह बताओ
अपने आप से तुम
कैसे छिपाओगे अपने जख्म ?
हर रोज
चेहरे का रंग बदलने की
सड़ी गली रस्म
आखिर कब तक निबाहोगे ?
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