कछुए और खरगोश की कहानी
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कछुए की तरह
निरंतर चलते रहना
और दौड़ जीत जाना
कहावत हो गयी पुरानी |
खरगोश की तरह
निरंतर दौड़ोगे
रास्ते में सोने का
इरादा भी छोड़ोगे
तब भी दौड़ में नहीं जीतोगे |
खरगोश
अब दौड़ में जीतने
का ख्वाब देख सकता हैं |
जीतते हैं वे
जो राजमहलों में
मखमली बिस्तर पर सोते हैं
वे
दौड़ में शामिल भी नहीं होते
और जीत जाते हैं |
वे ख्वाब भी नहीं देखते
दौड़ में शामिल भी नहीं होते
वे विजेता हैं
दौड़ ख़त्म होने से पहले ही
जीत का जश्न
मनाने में व्यस्त हो जाते हैं |
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कछुए की तरह
निरंतर चलते रहना
और दौड़ जीत जाना
कहावत हो गयी पुरानी |
खरगोश की तरह
निरंतर दौड़ोगे
रास्ते में सोने का
इरादा भी छोड़ोगे
तब भी दौड़ में नहीं जीतोगे |
खरगोश
अब दौड़ में जीतने
का ख्वाब देख सकता हैं |
जीतते हैं वे
जो राजमहलों में
मखमली बिस्तर पर सोते हैं
वे
दौड़ में शामिल भी नहीं होते
और जीत जाते हैं |
वे ख्वाब भी नहीं देखते
दौड़ में शामिल भी नहीं होते
वे विजेता हैं
दौड़ ख़त्म होने से पहले ही
जीत का जश्न
मनाने में व्यस्त हो जाते हैं |
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