ईश्वर
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जिसे देखा नहीं
महसूस नहीं किया
उसके आस्तित्व को
मन स्वीकारता नहीं |
जब जब जाता हूँ मंदिर
वहां बैठा आपका ईश्वर
हर बार मुझसे कहता है=
"मैं तुमको पहचानता नहीं "
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जिसे देखा नहीं
महसूस नहीं किया
उसके आस्तित्व को
मन स्वीकारता नहीं |
जब जब जाता हूँ मंदिर
वहां बैठा आपका ईश्वर
हर बार मुझसे कहता है=
"मैं तुमको पहचानता नहीं "
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