अब सवाल यह नहीं है कि
कैसे बदलोगे व्यवस्था को
कैसे बदलोगे तुम,जुतोगे रथ में
अब सवाल यह नहीं है कि
रंग ने अपना रंग क्यों बदल लिया
क्यों खुल गयी बंधी हुई मुट्ठी |
बिल्ली नें खुद ही बाँध ली है
अपने गले में घंटी
अब सवाल यह है कि इसे खोलेगा कौन ?
कैसे बदलोगे व्यवस्था को
कैसे बदलोगे तुम,जुतोगे रथ में
अब सवाल यह नहीं है कि
रंग ने अपना रंग क्यों बदल लिया
क्यों खुल गयी बंधी हुई मुट्ठी |
बिल्ली नें खुद ही बाँध ली है
अपने गले में घंटी
अब सवाल यह है कि इसे खोलेगा कौन ?
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