धर्म बाज़ हैं,
समाज के ठेकेदार
जब चाहते हैं, जैसे चाहते हैं
खुशरंग परिंदों का
शिकार करने में इसका इस्तेमाल करते हैं
परिंदे इस बाज़ का शिकार होते हैं |
समाज के ठेकेदार
जब चाहते हैं, जैसे चाहते हैं
खुशरंग परिंदों का
शिकार करने में इसका इस्तेमाल करते हैं
परिंदे इस बाज़ का शिकार होते हैं |
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