१)
वह,
चांदनी रातों में
घर से निकलता है
सूरज के ताप से डरता है.
२)
दर्द कम हों जहां
ऐसा नहीं कोई जहां ?
३)
तब न कह सका
अब न कहूँगा,चुप रहूंगा
तुमने ही तो कहा था
बात कहने से छोटी हो जाती है
उस बड़ी बात को
अब छोटी नहीं करूंगा
कुछ नहीं कहूँगा,चुप रहूंगा.
उम्र के इस पड़ाव पर
मेरा मन
जानता है भाषा का बौनापन
इसलिए चुप रहूंगा, कुछ नहीं कहूँगा
वह,
चांदनी रातों में
घर से निकलता है
सूरज के ताप से डरता है.
२)
दर्द कम हों जहां
ऐसा नहीं कोई जहां ?
३)
तब न कह सका
अब न कहूँगा,चुप रहूंगा
तुमने ही तो कहा था
बात कहने से छोटी हो जाती है
उस बड़ी बात को
अब छोटी नहीं करूंगा
कुछ नहीं कहूँगा,चुप रहूंगा.
उम्र के इस पड़ाव पर
मेरा मन
जानता है भाषा का बौनापन
इसलिए चुप रहूंगा, कुछ नहीं कहूँगा
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