Sunday, 21 September 2014

बाबुषा कोहली की कविता ब्रेकअप पर एक प्रतिक्रिया
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लम्बी कविता को पढ़ने का साहस कभी नहीं कर पाया इसीलिए मुक्तिबोध को भी "अँधेरे में" ही छोड़कर चला आया | 
तुम्हारी ह्त्या करने के बाद 
उसने आत्मह्त्या करने का अपराध भी तो किया था 

हत्यारे को किस अपराध से 
दोषमुक्त किये जाने की प्रार्थना है यह |

सात फिट लम्बे व्यक्ति को हम अमिताभ बच्चन मान लेने का गुनाह तो नहीं कर सकते, मनोज बाजपेई  और रघुबीर यादव जैसे साधारण कद-काठी के व्यक्ति में भी प्रतिभा दिखाई पड़ जाती है | पीठ ऊँची ऊंट की उँचाई से नहीं होती होती ही है होती ही है पीठ ऊँची ऊंट की | लम्बी होने मात्र से ही कोई कविता श्रेष्ठ नहीं हो जाती |
कविता
जब आवश्यकता से अधिक
लम्बी हो जाती है
अँधेरे में भी नहीं पढ़ी जाती है
आलोचकों के लिए
आसान होता है उसका महिमा मंडन
क्योकि एक पाठ में
वह कभी नहीं पढ़ी जाती है
महाकाव्य की तरह
किताबों में क़ैद कर दी जाती है
और पुस्तकालयों की शोभा बढ़ाती है
कभी-कभी कोई छात्र उस लम्बी कविता को
शोध का विषय बनाता है
और शोध के दौरान ही उस कविता से ऊब जाता है |

ओम भाई, मेरी प्रतिक्रिया बाबुषा कोहली की कविता पर न होकर मुख्यतः लम्बी कविताओं पर की जाने वाली समीक्षाओं के विरोध में है,मुक्तिबोध की कविता अँधेरे में पर लिखने वाला कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो यह कह सके कि उसने उस कविता की एक-एक लाइन पढ़ी है तो बताइयेगा | बाबुषा की कविता निश्चित ही एक अच्छी कविता है | किसी भी ब्रेक-अप में दो पक्ष होते हैं, क्या दूसरा पक्ष इस ब्रेक-अप से प्रभावित नहीं होता ?


Baabusha Kohli Avdhesh Nigam Ji : 'मैं इस मतलबी संसार में उसकी इकलौती वकील हूँ' . आपके सवाल का जवाब आख़िरी खंड में. 

पूरा आख़िरी खंड.




निश्चित ही कविता के आखिरी खंड में आपने उसकी भरपूर वकालत की है लेकिन मुझे लगता है कि यदि कविता " सलीब पर टंगी है उसकी मुक्ति कीलों से बिंधी हुयी
सहते- सहते कब्र में ढह जाएगा मगर खुद के बचाव में कभी मुँह न खोलेगा " यहीं पर ख़त्म हो जाती त
ो वकील दोनों पक्षों के साथ तटस्थ भाव से खड़ा दिखाई पड़ता | लेकिन इसके आगे जब आप यह लिखती हैं कि "उसकी चुप्पी उसके हक़ में सबसे बड़ी दलील है " तब ऐसा ध्वनित होता है " क्योकि वह बहुत बड़ा जलील है "| अंत में फिर एक बार कहना चाहूंगा कि ब्रेक-अप एक अच्छी कविता है और कविता होने के सारे तत्व इसमें मौजूद है | इस कम उम्र में ऐसी कविता लिखने के लिए आपकी प्रशंसा की ही जानी चाहिए


Om Nishchal अवधेश भाई आपने तो इस कविता की अस्‍थिमज्‍जा तक पहुंच चुके है तभी आपने इतने यकीन और हक़ से अपनी बातें कही हैं। आपके सावधान पाठ और सतर्क भाष्‍य की सराहना करता हूं।

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