उसके चुप रहने में भी
तुम्हें साजिश दिखती है
उसके बोलने को भी
तुम शक की नजर से देखते हो
तुम्हें साजिश दिखती है
उसके बोलने को भी
तुम शक की नजर से देखते हो
तुम चाहते हो कि
वह जब बोले तो तुमसे पूछकर बोले
उसका चुप रहना
हमेशा तुम्हारे पक्ष में हो
ताकि तुम उसपर
पक्षपात करने का आरोप लगा सको
और उसे धर्म निरपेक्षता का पाठ पढ़ा सको |
वह जब बोले तो तुमसे पूछकर बोले
उसका चुप रहना
हमेशा तुम्हारे पक्ष में हो
ताकि तुम उसपर
पक्षपात करने का आरोप लगा सको
और उसे धर्म निरपेक्षता का पाठ पढ़ा सको |
हम हमेशा खुद को मदारी की भूमिका में देखना चाहते हैं जबकि हम जिंदगी भर बन्दर की भूमिका निभाने के लिए अभिशप्त हैं |
हमारी आस्थाएं हमें हिंसक होने की इज़ाज़त नहीं देती | धर्म के प्रति हिंसक कट्टरता को क्या आप आस्था का नाम देंगे ?
चीखने पर भी नहीं सुनते
बिन कहे जो समझ जाएँ
ऐसे लोग अब कहाँ ?
बिन कहे जो समझ जाएँ
ऐसे लोग अब कहाँ ?
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