Sunday, 24 February 2013

गंदा है तो क्या, धंधा है ?
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धंधा है जी धंधा है
गंदा है तो क्या, धंधा है ?
साहित्यकार पैसा देकर किताब छपवा रहे हैं
और प्रकाशक मज़े से मलाई खा रहे हैं
धर्म गुरु लोग टी.वी पर कृपा बरसा रहे हैं, तो क्या ?
अरे भाई धंधा है
गंदा है तो क्या ?
नेता वोट के लिए नोट बरसा रहे हैं
और वोटर अपने वोट की कीमत पा रहे हैं
अरे भाई यह तो धंधा है
गन्दा है तो क्या ?
अरे भाई सब ठीक तो चल रहा है
तुम्हारा दिल क्यों जल रहा है ?
कहते है किसी देश की प्रगति उसके आर्थिक विकास पर निर्भर है
आर्थिक विकास के लिए जरूरी है
धंधा ठीक चले
और इस देश में
गंदे है तो क्या ?
सारे धंधे ठीक से चल रहे हैं
देश की प्रगति निश्चित है |

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