Friday, 22 February 2013

आईने में
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झूठ से
मत करो आहत
सच की मार से
लहुलुहान होना चाहती हूँ |
मैं औरत हूँ
आईने में
अपने अक्श से भी डरती हूँ
लेकिन तुम्हारे लिए
उसी आईने के सामने
जिंदगी भर संवरती हूँ |
मैं औरत हूँ
आईने में
अपने अक्श से भी डरती हूँ
पकड़ा है तुम्हारा झूठ
कई बार
इसीलिए हर कदम
फूँक फूँक कर रखती हूँ |
सच की मार से
लहुलुहान होना चाहती हूँ |
 

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