Wednesday, 25 July 2018

वामपंथियों ने कभी वंशवादी और भ्रष्ट कांग्रेस की पूंछ पकड़ी तो कभी अवसरवादी लालू, मुलायम, नीतीश, करूणानिधि जैसों का पिछलग्गू बनकर चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश की। यह राजनीतिक अवसरवाद निश्चित ही इनके लिए आत्मघाती साबित हुआ.वामपंथ आज अप्रासंगिक हो चुका है.वामपंथियों के थिंक टैंक के दोगलेपन ने उन्हें जनता के सामने नंगा कर दिया है. हजारों वर्षों की गुलामी ने हमारे  DNA  को प्रभावित किया है .इस देश के बुद्धिजीवियों ने भ्रष्ट सिस्टम के पक्ष में खड़े होकर उसे ताक़तवर बनाने में मदद की है और बदले में खूब मलाई खाई. 

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