जब जो किया
अधूरे मन से किया
सम्पूर्णता में
एक क्षण भी नहीं जिया
न खुलकर हंसा
न जीभर रोया
जाना तो होगा ही
अब बचा ही क्या है
मनचाहा जो भी जिया
सपनों में ही जिया
अधूरे मन से किया
सम्पूर्णता में
एक क्षण भी नहीं जिया
न खुलकर हंसा
न जीभर रोया
जाना तो होगा ही
अब बचा ही क्या है
मनचाहा जो भी जिया
सपनों में ही जिया
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