उन्हें
अपनी दुकान चलानी थी
तो कोई न कोई कहानी तो बनानी थी
उन्होनें कहानी सुनाई
और हम कहानी सुनते-सुनते सो गए
तब के सोय
अब जागेगे कब खुदा भी नहीं है जानता ?
हमें इंतज़ार है क़यामत का और
जन्नत की परियाँ
खुश हैं शैतान के साथ |
अपनी दुकान चलानी थी
तो कोई न कोई कहानी तो बनानी थी
उन्होनें कहानी सुनाई
और हम कहानी सुनते-सुनते सो गए
तब के सोय
अब जागेगे कब खुदा भी नहीं है जानता ?
हमें इंतज़ार है क़यामत का और
जन्नत की परियाँ
खुश हैं शैतान के साथ |
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