Monday, 12 June 2017

बचपन में पढ़ा था
एक संतुष्ट सुअर से
बेहतर होता है
एक असंतुष्ट सुकरात

उम्र के इस पड़ाव पर
मैंने पाया कि मैं
न गधा रहा न घोड़ा
मेरे व्यक्तित्व में
दोनों ही शामिल हैं थोड़ा-थोड़ा |
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अवधेश निगम

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