वे जानते थे बैशाखियों के सहारे चलने वाले किसी भी दौड़ में शामिल होनें की काबलियत खो बैठते हैं | ये बैसाखियां ही दुश्मन हैं और लोग इन्हें खोना नहीं चाहते | सरकारों ने दलितो, पिछडों, और अल्पसंख्यकों को सिर्फ लाभार्थी समझा और एक बड़े वर्ग को किसी भी प्रतियोगिता में शामिल होने से वंचित कर दिया |
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