इशारों से
मुझे अब कोई नहीं बुलाता
अब तो
सपनों में भी कोई नहीं आता
न बुलाता है
न सपनों में आता है
सिर्फ और सिर्फ रूलाता है
वह दोस्त है या कि दुश्मन
मुझे समझ में नहीं आता है ?
मुझे अब कोई नहीं बुलाता
अब तो
सपनों में भी कोई नहीं आता
न बुलाता है
न सपनों में आता है
सिर्फ और सिर्फ रूलाता है
वह दोस्त है या कि दुश्मन
मुझे समझ में नहीं आता है ?
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