Monday, 16 March 2015

मंदिर को
मुसलामानों ने हथियाया
या हिन्दुओं ने मस्जिद को गिराया
इन बातों का अब कोई अर्थ नहीं है
अब देखना यह है कि
आमजन के हिस्से की रोटी को किसने चुराया
और मंदिर और मस्जिद ने
हमेशा उस चोर के पक्ष में ही क्योंकर फैसला सुनाया ?
इस मंदिर और मस्जिद के चक्कर में
केवल और केवल आमजन का खून बहाया, आखिर क्यों ? 

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