एकांत में
कुछ कांपता है
क्या कांपता है एकांत में ?
पत्तियां टूटती गयीं .....टूटती गयीं
बनती गयीं भीड़
भीड़ ,जहां कुछ नहीं कांपता
क्यों नहीं कांपता
कुछ भी भीड़ में ?नदी में चेहरा कांपता है
क्यों कांपता है चेहरा नदी में ?
आओ ,
एकांत और नदी से बचें
भीड़ हो जायें |
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