सन्नाटा चीर दे
कोई शोर
ऐसा
हो
भी तो
सब खामोश हैं |
दीवारों पर लगे पोस्टर
आकर्षित नहीं करते
राहत नहीं देती
पेड़ की छाँव भी |
कोई नोचे मेरे बालों को
खसोटे मुझको
किसी दर्द से जगना चाहता हूँ
मैं अपने होने को
महसूसना चाहता हूँ
सब नख-हीन हैं |
कोई शोर
ऐसा
हो
भी तो
सब खामोश हैं |
दीवारों पर लगे पोस्टर
आकर्षित नहीं करते
राहत नहीं देती
पेड़ की छाँव भी |
कोई नोचे मेरे बालों को
खसोटे मुझको
किसी दर्द से जगना चाहता हूँ
मैं अपने होने को
महसूसना चाहता हूँ
सब नख-हीन हैं |
No comments:
Post a Comment