बहुत हुआ मोदी-मोदी का शोर
चलो चलें अब खेतों की ओर |
तुम बनाते रहे सीढ़ी
सीढ़ी किसी और की हो-ली
हैप्पी होली-हैप्पी होली ====
चलो चलें अब खेतों की ओर |
तुम बनाते रहे सीढ़ी
सीढ़ी किसी और की हो-ली
हैप्पी होली-हैप्पी होली ====
न जाने क्यों
अपना दोगलापन दिखता ही नहीं है ?
अपना दोगलापन दिखता ही नहीं है ?
एक जाति विशेष / समुदाय को फायदा पहुचाने के सरकारी रवैये से जनता बहुत ज्यादा नाराज नहीं होती अगर बात-बात में बहुसंख्यकों को जलील करने की कोशिश इसमें शामिल नहीं होती |
मोदी विरोधियों और तथाकथित सेक्युलरों को नमन | उत्तर प्रदेश में मोदी की इस भयंकर जीत के लिए आप सबके योगदान को नकारा नहीं जा सकता है |आपका विष वमन ही तो मोदी पर अमृत बनकर बरसा है |
एक दिन के लिए
आसमान पर बैठा देते हो
फिर उसका आसमान ही छीन लेते हो,
शुभकामनायें देने का तुम्हारा यह अंदाज़
शायराना भी है कातिलाना भी है |
आसमान पर बैठा देते हो
फिर उसका आसमान ही छीन लेते हो,
शुभकामनायें देने का तुम्हारा यह अंदाज़
शायराना भी है कातिलाना भी है |
सबके सब नंगे, हर-हर गंगे |
जेएनयू से अभिव्यक्ति की आज़ादी का उद्घोष करने वाले प्रकाश झा की फिल्म 'लिपस्टिक अंडर माइ बुर्का' पर सेंसर बोर्ड की आपत्तियों पर खामोश क्यों रहे ?
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