Friday, 24 March 2017

बहुत हुआ मोदी-मोदी का शोर 
चलो चलें अब खेतों की ओर  |


तुम बनाते रहे सीढ़ी 
सीढ़ी किसी और की हो-ली 
हैप्पी होली-हैप्पी होली ====

न जाने क्यों 
अपना दोगलापन दिखता ही नहीं है ?


एक जाति विशेष / समुदाय को फायदा पहुचाने के सरकारी रवैये से जनता बहुत ज्यादा नाराज नहीं होती अगर बात-बात में बहुसंख्यकों को जलील करने की कोशिश इसमें शामिल नहीं होती |

मोदी विरोधियों और तथाकथित सेक्युलरों को नमन | उत्तर प्रदेश में मोदी की इस भयंकर जीत के लिए आप सबके योगदान को नकारा नहीं जा सकता है |आपका विष वमन ही तो मोदी पर अमृत बनकर बरसा है |

एक दिन के लिए 
आसमान पर बैठा देते हो 
फिर उसका आसमान ही छीन लेते हो, 
शुभकामनायें देने का तुम्हारा यह अंदाज़ 
शायराना भी है कातिलाना भी है |

सबके सब नंगे, हर-हर गंगे |

जेएनयू से अभिव्यक्ति की आज़ादी का उद्घोष करने वाले प्रकाश झा की फिल्म 'लिपस्टिक अंडर माइ बुर्का' पर सेंसर बोर्ड की आपत्तियों पर खामोश क्यों रहे ?

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