मिट्टी भी स्पर्श से
रूपांतरित हो जाती है
फिर वह मिट्टी नहीं
मूर्ति कहलाती है
कुम्हार की तरह
हौले से हाथ लगाओगे
तो जैसे चाहोगे
वैसे बर्तन बनाओगे |
रूपांतरित हो जाती है
फिर वह मिट्टी नहीं
मूर्ति कहलाती है
कुम्हार की तरह
हौले से हाथ लगाओगे
तो जैसे चाहोगे
वैसे बर्तन बनाओगे |
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