Wednesday, 26 February 2014

प्रकाश
अन्धकार को
अन्धकार प्रकाश को
दोनों एक दूसरे को ढूंढ रहे हैं  |
अनंत काल से
लुका-छिपी का खेल खेल रहे हैं  |



चुक जानें के बोध से उत्पन्न ग्लानि से बचने के लिए लिखनें की कोशिश करता हूँ ,न लिख पाता हूँ ,न चुक जाने के बोध से बच पाता हूँ |


अक्सर पाठक रचना में वह अर्थ खोज लेता है जो अर्थ रचनाकार के दिमाग में कभी कौंधा ही नहीं |

जिन बच्चों को 
खिलौनें नहीं मिलते 
खिलौनें तोड़ने में 
वे रस पाते हैं अभागे 
रिश्तों की लम्बी कतारों में 
खुद को 
नितांत अकेला पाते हैं |


महिलाओं से अगर पुरुष से उनकी अपेक्षाएं पूछी जाएंगी तो वह सच नहीं बोल पाएंगी | महिलाएं सच बोलने से डरती हैं क्योकि वे जानती हैं कि पुरुष में महिलाओं का सच सुनने की सामर्थ्य नहीं है | पुरुष महिलाओं का सच सुनने से डरता क्यों है 


No comments:

Post a Comment