मेरी गृहस्थी
तुमने कहा था
आओगे देखने मेरी गृहस्थी
मैं
अपनी गृहस्थी
चुन चुन कर सजाता रहा
एक बर्तन टूटता
दूसरा खरीद लाता
टूटे बर्तनों को मैं
तुमसे छिपाना चाहता था
सजाये रखना चाहता था
अपनी गृहस्थी तुम्हारे आने तक
ताकि तुम्हें उदास देख सकूँ ।
कुमार अवधेश
तुमने कहा था
आओगे देखने मेरी गृहस्थी
मैं
अपनी गृहस्थी
चुन चुन कर सजाता रहा
एक बर्तन टूटता
दूसरा खरीद लाता
टूटे बर्तनों को मैं
तुमसे छिपाना चाहता था
सजाये रखना चाहता था
अपनी गृहस्थी तुम्हारे आने तक
ताकि तुम्हें उदास देख सकूँ ।
कुमार अवधेश
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