बदलता कुछ भी नहीं है
जीवन की इस यात्रा में
हमारे जेहन पर
पड़ी धूल-मिटटी के कारण
गुजरा हुआ
कुछ धुंधला-धुंधला सा दिखता है
और तमाम उम्र हारने के बाद
जीत का स्वाद बढ़ जाता है |
जीवन की इस यात्रा में
हमारे जेहन पर
पड़ी धूल-मिटटी के कारण
गुजरा हुआ
कुछ धुंधला-धुंधला सा दिखता है
और तमाम उम्र हारने के बाद
जीत का स्वाद बढ़ जाता है |
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