1)
चुनावी माहौल में
वे खेल रहे हैं गाली गाली का खेल
न जाने कौन होगा पास
और कौन होगा फेल ?
2)
धर्म के नाम पर
करता है जो धंधा
वह है गंदा |
इस चुनावी माहौल में
इन धंधेबाजों के पास
कोई नेता क्योंकर जाता है
कितना भी मंदबुद्धि हो
इतना तो उसको भी समझ में आता है |
3)
एड्स से भी खतरनाक बीमारी है धर्म और कुछ लोगों ने इसे धंधा बना लिया है और शेष को अंधा |
4)
मोदी के बहाने शंकराचार्य स्वरूपानंद की भी कुछ चर्चा हो गयी वरना शंकराचार्यों को अब पूछता कौन है ?
5)
मन में सहेजकर
रख लिया था जो कभी चुपचाप
उन पुरानी यादों की
अब नहीं सुनाई देती
खुद मुझे कोई पदचाप
अभी अभी मुझे मालूम हुआ
इस उम्र में क्यों बढ़ गया है रक्तचाप ?
6)
चाही थी
एक रात
तुम्हारे साथ
न तुम आईं
न रात आई |
चुनावी माहौल में
वे खेल रहे हैं गाली गाली का खेल
न जाने कौन होगा पास
और कौन होगा फेल ?
2)
धर्म के नाम पर
करता है जो धंधा
वह है गंदा |
इस चुनावी माहौल में
इन धंधेबाजों के पास
कोई नेता क्योंकर जाता है
कितना भी मंदबुद्धि हो
इतना तो उसको भी समझ में आता है |
3)
एड्स से भी खतरनाक बीमारी है धर्म और कुछ लोगों ने इसे धंधा बना लिया है और शेष को अंधा |
4)
मोदी के बहाने शंकराचार्य स्वरूपानंद की भी कुछ चर्चा हो गयी वरना शंकराचार्यों को अब पूछता कौन है ?
5)
मन में सहेजकर
रख लिया था जो कभी चुपचाप
उन पुरानी यादों की
अब नहीं सुनाई देती
खुद मुझे कोई पदचाप
अभी अभी मुझे मालूम हुआ
इस उम्र में क्यों बढ़ गया है रक्तचाप ?
6)
चाही थी
एक रात
तुम्हारे साथ
न तुम आईं
न रात आई |
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