Sunday, 9 December 2012

बेटू
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आज तुम
अपने पैरों पर
खड़े होने की कोशिश
कर रहे थे |
चारपाई को पकड़ कर
खड़े होते
सम्हलते
चारपाई छोड़ देते
और इस तरह तुम बार बार गिरते |

तुम्हारी इन
सारी हरकतों के दौरान
तुम्हारे कन्धों पर
मैं पहाड़ों का उगना देखता रहा |

तुम्हें मालूम है बेटू
जब मुझे अपने पैरों पर
चलना आया था
कई पहाड़ों को एक साथ
अपने कन्धों पर
बैठा हुआ पाया था |

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