जिंदगी में जो भी प्रयोग किये सब में नाकामयाबी मिली
अब तो जीने में डर लगता है
प्रयोग करने का हौशला ख़त्म
रोशनी की किरण दफ्न
अंधेरों से अब डर नहीं लगता
डरता हूँ रोशनी से अब
अब तो जीने में डर लगता है
प्रयोग करने का हौशला ख़त्म
रोशनी की किरण दफ्न
अंधेरों से अब डर नहीं लगता
डरता हूँ रोशनी से अब
संबंधों की कभी प्राकृतिक मौत नहीं होती
ReplyDeleteउनका खून किया जाता है
हमारे अहंकार द्वारा या
हमारे आचरण द्वारा
या फिर हमारी अज्ञानता इसका कारण होती है |
संबंधों को शाश्वत बनाने की जुगत करे हम |